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Wednesday, November 4, 2026

बूंदी चिकित्सालय में चिकित्सा व्यवस्थाओं की खुली पोल, गंभीर डेंगू मरीज को भर्ती कराने के लिए एक घंटे तक भटकता रहा पिता**चिकित्सकों द्वारा मेडिकल वार्ड में भर्ती करने के निर्देश के बावजूद एक वार्ड से दूसरे वार्ड के चक्कर लगवाते रहे कर्मचारी, पूर्व बीज निगम निदेशक चर्मेश शर्मा के हस्तक्षेप के बाद हुआ मरीज का उपचार शुरू**

राजेश खोईवाल बूंदी (राजस्थान टीवी न्यूज़) जिला चिकित्सालय बूंदी में चिकित्सा व्यवस्थाओं और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार रात चिकित्सालय में एक गंभीर डेंगू पीड़ित मरीज को समय पर उपचार और भर्ती की सुविधा नहीं मिलने का मामला सामने आया। चिकित्सकों द्वारा मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती करने के लिए लिखे जाने के बावजूद बीमार बेटे को लेकर उसका मजबूर पिता करीब एक घंटे तक एक वार्ड से दूसरे वार्ड के चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं भी उसे भर्ती नहीं किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चापरस निवासी सत्यनारायण मेघवाल डेंगू से पीड़ित होने के कारण गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय पहुंचा था। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मेडिकल वार्ड में भर्ती करने के निर्देश दिए। इसके बाद उसके पिता छोटूलाल अपने बीमार बेटे को लेकर ट्रॉमा वार्ड से मेडिकल वार्ड पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें ऊपर दूसरे वार्ड में भेज दिया गया। जब पिता बेटे को लेकर ऊपर मेडिकल वार्ड पहुंचे तो वहां भी भर्ती करने से मना कर दिया गया और उसे मातृ एवं शिशु चिकित्सालय स्थित जनाना-बच्चा वार्ड में भेज दिया गया।

हैरानी की बात यह रही कि जनाना-बच्चा वार्ड पहुंचने पर भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया और वापस मेडिकल वार्ड भेज दिया गया। इस तरह गंभीर रूप से बीमार बेटे को लेकर पिता एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक भटकता रहा। एक ओर बेटा बीमारी से परेशान था, वहीं दूसरी ओर पिता को अस्पताल की व्यवस्थाओं के बीच अपने बेटे के इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था।

इसी दौरान राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी मिलने पर पीएमओ डॉ. गोविंद गुप्ता को अवगत करवाया और अस्पताल की इस स्थिति पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उनके हस्तक्षेप और पीएमओ को मामले से अवगत करवाने के बाद आखिरकार मरीज को भर्ती किया गया और उपचार की प्रक्रिया शुरू हुई।

**सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चिकित्सक स्वयं मरीज को मेडिकल वार्ड में भर्ती करने के निर्देश दे चुके थे, तो फिर एक गंभीर डेंगू मरीज को भर्ती करने के लिए उसके पिता को एक घंटे तक क्यों भटकना पड़ा?**

जिला चिकित्सालय जैसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में यदि गंभीर मरीजों को भर्ती कराने के लिए परिजनों को इस तरह परेशान होना पड़े तो आम गरीब और असहाय मरीजों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं, वार्डों के बीच समन्वय और मरीजों के प्रति जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत है कि अस्पताल प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर जिम्मेदारी तय करे, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज और उसके परिजनों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

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