बूंदी (राजस्थान टीवी न्यूज) 2 अकबर
वि 2 अक्विटूबर।ख्यात ज्योतिषाचार्य एवं टैरो कार्ड रीडर सोमा माहेश्वरी के अनुसार दीपावली केवल दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन से अज्ञान, नकारात्मकता और अंधकार को मिटाकर सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का पावन पर्व है। दीपावली ऐसा महापर्व है, जिसका इंतजार हर उम्र के व्यक्ति को पूरे वर्ष रहता है। यह पांच दिवसीय उत्सव धनतेरस से प्रारंभ होकर भाई दूज तक चलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में मनाया जाने वाला यह पर्व हमें धर्म, आस्था, पारिवारिक प्रेम, सेवा और खुशहाली का संदेश देता है। विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य एवं टैरो कार्ड रीडर सोमा माहेश्वरी के अनुसार वर्ष 2026 में दीपोत्सव के प्रमुख पर्व 6 नवंबर से 11 नवंबर तक मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं इन पांच दिनों का धार्मिक महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्त।
**1. धनतेरस : आरोग्य और समृद्धि का पर्व**
6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है।
इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।
**2. नरक चतुर्दशी एवं काली चौदस : बुराई पर अच्छाई की विजय**
7 नवंबर 2026, शनिवार को काली चौदस की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर उसके अत्याचारों से 16 हजार राजकुमारियों को मुक्त कराया था।
इस दिन हनुमान जी और माता काली की आराधना भी की जाती है। अभ्यंग स्नान को भी विशेष महत्व दिया गया है। यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मकता और बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है।
**3. दीपावली : माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना**
8 नवंबर 2026, रविवार को दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूर्ण कर और रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरी नगरी को रोशन किया था।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी लोग अपने घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों को दीपों एवं रोशनी से सजाते हैं। इस दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा की जाती है।
दी गई पंचांग गणना के अनुसार लक्ष्मी पूजन का प्रमुख मुहूर्त शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक रहेगा।
**4. गोवर्धन पूजा : प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश**
10 नवंबर 2026, मंगलवार को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाया जाएगा। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त किया था।
इस दिन गोवर्धन पर्वत, गौमाता और प्रकृति की पूजा की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग एवं अन्नकूट का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
दिया गया पूजा मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक है।
**5. भाई दूज : भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक**
11 नवंबर 2026, बुधवार को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने पहुंचे थे। यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
दिया गया तिलक मुहूर्त दोपहर 1:10 से 3:20 बजे तक है।
**अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा-सा दीपक उसे मिटाने की ताकत रखता है।**
दीपावली का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन से अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता को मिटाकर प्रेम, सद्भावना, दया, सेवा और मानवता के दीप जलाने चाहिए।
आइए, इस दीपावली पर केवल अपने घरों को ही नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन को भी खुशियों के प्रकाश से रोशन करें।
**ज्योतिषाचार्य एवं टैरो कार्ड रीडर सोमा माहेश्वरी की ओर से आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।**
मां लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे और आपका जीवन सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के प्रकाश से सदैव आलोकित रहे।