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Tuesday, October 27, 2026

ग्राम रोनिजा के विद्यालय को पुनः चालू करवाने की मांग 68 बच्चों के भविष्य का सवाल, ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

राजेश खोईवाल 
बूंदी (राजस्थान टीवी न्यूज)
बूंदी। जिले की ग्राम पंचायत रोनिजा के कीरों का झोपड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय को पुनः शुरू करवाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। विद्यालय बंद होने से मजदूर परिवारों के 68 बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से विद्यालय को शीघ्र पुनः संचालित करवाने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक 14(4) शिक्षा-1/जिला बूंदी/2014, दिनांक 14 अगस्त 2014 की पालना में कीरों का झोपड़ा स्थित विद्यालय को वर्ष 2015 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रोनिजा में मर्ज कर दिया गया था। इसके बाद से कीरों का झोपड़ा का विद्यालय बंद है।

**दोनों विद्यालयों के बीच दूरी बनी बच्चों की परेशानी**

ग्रामीणों का कहना है कि कीरों का झोपड़ा से रोनिजा स्थित विद्यालय की दूरी लगभग 2.5 किलोमीटर से अधिक है, जबकि विद्यालयों को मर्ज करने के दौरान दूरी लगभग एक किलोमीटर बताई गई थी। अधिक दूरी के कारण छोटे बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों को आमरोड़ पक्की सड़क से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

ग्रामीणों ने बताया कि कीरों का झोपड़ा क्षेत्र में कहार (कीर), गुर्जर एवं माली समाज के अनेक परिवार निवास करते हैं। इनमें अधिकांश परिवार मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन परिवारों के लिए बच्चों को इतनी दूर विद्यालय भेजना कठिन हो रहा है, जिससे उनकी शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

**विद्यालय में नामांकन के लिए पर्याप्त बच्चे**

ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन के अनुसार, क्षेत्र में 3 से 5 वर्ष तक के 19 बच्चे तथा 6 से 11 वर्ष तक के 49 बच्चे हैं। इस प्रकार कुल 68 बच्चे हैं, जो विद्यालय में नामांकन की दृष्टि से पर्याप्त संख्या दर्शाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय पुनः शुरू होने से इन बच्चों को गांव के नजदीक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।

**भवन सुरक्षित, ग्रामीण सफाई और मरम्मत के लिए तैयार**

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि बंद पड़े विद्यालय का भवन सुरक्षित स्थिति में है तथा शिक्षण कार्य के लिए उपयोगी है। भवन में कोई बड़ी टूट-फूट या क्षति नहीं हुई है। अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर की सफाई, झाड़-झंखाड़ हटाने तथा छोटी-मोटी मरम्मत और पुताई करवाने की जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से निभाने की सहमति जताई है।

**ग्रामीणों ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की**

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा की सुलभता और ग्रामीण परिवारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कीरों का झोपड़ा स्थित बंद विद्यालय को पुनः चालू करवाने के लिए संबंधित शिक्षा विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।

ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा बूंदी तथा जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), बूंदी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी पंचायतीराज चुनाव से पूर्व विद्यालय को पुनः शुरू नहीं करवाया गया, तो वे स्वेच्छा से मतदान का बहिष्कार करने पर विचार करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि **गांव के बच्चों को सुरक्षित और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।** प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द समाधान करना चाहिए, ताकि किसी भी बच्चे का भविष्य दूरी और संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित न हो।
इस दौरान ओम शंकर कहार, शिवकरण शर्मा, उत्तम सिंह दरोगा, भागीरथ कहार, मनीष कहार, गणेश कहार, राजू चोपदार शोभाग कीर,मदन सिंह, पोकर, आदि ग्रामीण मौजूद रहे

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